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Juli Kumari-October 31, 2022

Bronchitis: ब्रोंकाइटिस क्या है? लक्षण, कारण, निदान, उपचार और रोकथाम

Bronchitis-Symptoms

ठंड का मौसम गर्मी से राहत तो देता है, लेकिन साथ ही कुछ बीमारियों और इंफेक्शन का ख़तरा भी लाता है। इनमें सर्दी-खांसी की समस्या आम है। लेकिन अगर लगातार कई दिनों से खांसी के साथ बलगम की भी शिकायत है तो यह ब्रोंकाइटिस (Bronchitis) हो सकता है।

वहीं ब्रोंकाइटिस (Bronchitis) के लक्षणों में लगातार खांसी, सिर दर्द, सांस लेते समय आवाज आना और सांस लेने में कठिनाई होना आदि शामिल हैं। ध्यान देने वाली बात है कि फेफड़ों में सांस जिस रास्ते से आती और जाती है, उसे श्वास नली कहते हैं। वहीं, यदि श्वास नली में जलन और सूजन हो तो ब्रोंकाइटिस (Bronchitis) हो सकता है। ब्रोंकाइटिस (Bronchitis) की वजह से बलगम ज्यादा बनता है। ब्रोंकाइटिस (श्वसनीशोथ) को ब्रोन्कियल ट्यूबों की सूजन (Inflammation of the Bronchial Tubes) भी कहा जाता है।

ब्रोंकाइटिस (श्वसनीशोथ) के प्रकार  (Types of Bronchitis in Hindi)

ब्रोंकाइटिस दो तरह के होते हैं – एक्यूट ब्रोंकाइटिस और क्रॉनिक ब्रोंकाइटिस।

  1. एक्यूट ब्रोंकाइटिस (Acute Bronchitis): एक्यूट ब्रोंकाइटिस धूल, धुएं, वायु प्रदूषण, तंबाकू के धुएं जैसी चीजों के बीच सांस लेने या वायरस की  वजह से होता है। वहीं, एक्यूट ब्रोंकाइटिस (Acute Bronchitis) होना बहुत आमबात है। एक्यूट ब्रोंकाइटिस की वजह से भी हो सकता है। एक्यूट ब्रोंकाइटिस के लक्षण सर्दी-जुखाम ही होते हैं, जिसमें नाक बहने लगती है, खांसी होती है, सिर में हल्का दर्द रहता है।

आमतौर पर एक्यूट ब्रोंकाइटिस में 7 से 10 दिनों में सुधार हो जाता है। हालांकि, यदि इस अवधि के दौरान भी सुधार नहीं हो रहा हो और यह स्थिति 18-20 दिनों से ज्यादा समय तक हो, तो तत्काल डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

  1. क्रॉनिक ब्रोंकाइटिस (Chronic Bronchitis): क्रॉनिक ब्रोंकाइटिस एक गंभीर बीमारी है। वहीं क्रॉनिक ब्रोंकाइटिस (Chronic Bronchitis) का सबसे आम कारण सिगरेट पीना होता है। क्रॉनिक ब्रोंकाइटिस बीमारी में खांसी समय के साथ बढ़ती जाती है और कई बार महीनों तक रह   सकती है।

बुखार और थकान क्रॉनिक ब्रोंकाइटिस के दो मुख्य लक्षण हैं। यदि बुखार 100.4 डिग्री फेरेनहाइट हो और सर्दी के साथ सीने में दर्द, खांसी हो तो तत्काल डॉक्टर से सलाह लें | वहीं ब्रोंकाइटिस के 20 मामलों में से लगभग 1 मामले में निमोनिया होता है। हालांकि, ऐसा तभी होता है जब संक्रमण फेफड़ों में फैलता है।

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ब्रोंकाइटिस (श्वसनीशोथ) के लक्षण (Bronchitis Symptoms in Hindi)

ब्रोंकाइटिस दो तरह के होते हैं – एक्यूट ब्रोंकाइटिस और क्रॉनिक ब्रोंकाइटिस

एक्यूट ब्रोंकाइटिस के लक्षण (Symptoms of Acute Bronchitis)

एक्यूट ब्रोंकाइटिस की समस्या होने पर मरीज को कई लक्षण महसूस होते हैं। जैसे -

  •         गले में खराश होना।
  •         थकान महसूस होना।
  •         नाक में जमावट या नाक का बहना
  •         बुखार होना।
  •         शरीर में दर्द होना।
  •         उल्टी होना।
  •         दस्त होना।
  •         सांस लेते समय आवाज आना।
  •         सीने में जकड़न या दर्द होना।
  •         हल्का बुखार और सांस की तकलीफ होना।

क्रॉनिक ब्रोंकाइटिस के लक्षण (Symptoms of Chronic Bronchitis)

क्रॉनिक ब्रोंकाइटिस की समस्या होने पर मरीज को कई लक्षण महसूस होते हैं। जैसे -

  •         खांसी के दौरान आने वाले बलगम (थूक) में खून आना।
  •         थोड़े से काम करने के बाद सांस लेने में तकलीफ होना।
  •         बार-बार श्वसन संक्रमण होना जिससे लक्षण बिगड़ते हैं।
  •         सांस लेते समय सीटी या चीख की ध्वनि होना।
  •         थकान महसूस होना।
  •         टखने, पैर और पैर की सूजन जो दोनों तरफ को प्रभावित करती है।
  •         सिरदर्द होना।

ब्रोंकाइटिस (श्वसनीशोथ) के कारण (Bronchitis Causes in Hindi)

एक्यूट ब्रोंकाइटिस के कारण (Causes of Acute Bronchitis)

एक्यूट ब्रोंकाइटिस के कई कारण हो सकते हैं-

वायरल संक्रमण: 85 से 95 प्रतिशत लोगों को एक्यूट ब्रोंकाइटिस वायरस की वजह से होता है। वहीं जो वायरस आम सर्दी या फ्लू करते हैं, तीव्र ब्रोंकाइटिस भी कर सकते हैं।

बैक्टीरिया के कारण: कई बार ब्रॉन्काइटिस के वायरल संक्रमण के बाद बैक्टीरियल ब्रॉन्काइटिस हो सकता है। यह माइकोप्लाज्मा निमोने, क्लैमाइडिया निमोनिया और बोर्डेटेला पेरटसिस (जो काली खांसी करता है) जैसे बैक्टीरिया द्वारा हो सकता है।

उत्तेजक पदार्थों का सेवन: उत्तेजक पदार्थों जैसे धुआं, धुंध या रासायनिक धुएं में सांस लेने से आपकी वायु-नली और ब्रोन्कियल ट्यूबों में सूजन पैदा कर सकता है जिससे एक्यूट ब्रोंकाइटिस हो सकता है।

अन्य स्थितियां: क्रॉनिक ब्रॉन्काइटिस या अस्थमा की समस्या से ग्रस्त लोगों को कभी-कभी एक्यूट ब्रोंकाइटिस हो सकता है। इन मामलों में, एक्यूट ब्रोंकाइटिस संक्रामक नहीं होता है क्योंकि यह किसी संक्रमण के कारण नहीं हुआ होता है।

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क्रॉनिक ब्रोंकाइटिस के कारण (Symptoms of Chronic Bronchitis)

क्रॉनिक ब्रोन्काइटिस के कई कारण हो सकते हैं-

  •         धुंध, औद्योगिक प्रदूषकों और सॉल्वैंट्स के कारण
  •         वायरल और बैक्टीरियल संक्रमण जो एक्यूट ब्रोंकाइटिस करते हैं।
  •         अस्थमा, सिस्टिक फाइब्रोसिस, इम्युनोडेफिशिएंसी, संचयशील ह्रदय की विफलता, ब्रोन्काइटिस की पारिवारिक अनुवांशिकता और ब्रोन्किएकटासिस की वजह से भी क्रॉनिक ब्रॉन्काइटिस हो सकते हैं।

ब्रोंकाइटिस (श्वसनीशोथ) से बचाव कैसे करें? (Prevention of Bronchitis in Hindi)

ब्रोंकाइटिस से बचाव के कुछ उपाय निम्नलिखित हैं-

  •         धूम्रपान और वातावरण में मौजूद तंबाकू के धुएं के संपर्क में आने से बचें।
  •         वायरल संक्रमण के फैलाव को कम से कम करें।
  •         नम हवा में सांस लेने से बलगम पतला हो जाता है और उसे फेफड़ों से बाहर निकालना आसान हो जाता है।
  •         पानी पीने की वजह से भी फेफड़ों में मौजूद बलगम को पतला करने में मदद मिलती है।
  •         लाल मिर्च, करी पत्ता और अन्य मसालेदार खाद्य पदार्थ जो आपकी आँखों और नाक में पानी लाते हैं, आपके बलगम को को पतला कर सकते हैं।

Chronic-bronchitis

ब्रोंकाइटिस (श्वसनीशोथ) का इलाज (Bronchitis Treatment in Hindi)

एक्यूट ब्रोंकाइटिस

एक्यूट ब्रोंकाइटिस के अधिकांश मामलों का इलाज निम्नलिखित घरेलू तरीको से किया जा सकता है-

  •         कैफीन और अल्कोहल के अलावा अन्य तरल पदार्थ का सेवन करें।
  •         आराम करें।
  •         सूजन को कम करने, दर्द को कम करने और अपने बुखार को कम करने के लिए दर्द निवारक लें।
  •         खांसी की दवा का उपयोग करें।
  •         यदि आप धूम्रपान करते हैं तो छोड़ दें।

क्रॉनिक ब्रोंकाइटिस

क्रॉनिक ब्रोंकाइटिस का इलाज निम्नलिखित तरीकों से किया जाता है-

  1. इन्हेलर का इस्तेमाल : क्रॉनिक ब्रॉन्काइटिस का इलाज करने के लिए डॉक्टर आपको दवा दे सकते हैं। यह दवा आपके फेफड़ों में श्वसन नली को खोलती है और आपको बेहतर साँस लेने में मदद करती है। यह दवा आमतौर पर एक इन्हेलर से ली जाती है।
  2. दवाओं का इस्तेमाल : क्रॉनिक ब्रॉन्काइटिस के इलाज के लिए ब्रोन्कोडायलेटर्स और स्टेरॉयड दवाओं का इस्तेमाल भी किया जाता है।
  1. ऑक्सीजन थेरेपी: क्रॉनिक ब्रॉन्काइटिस से नुकसान के कारण आपके फेफड़े आपके शरीर में पर्याप्त ऑक्सीजन प्राप्त करने में सक्षम नहीं रहते। इसलिए डॉक्टर आपको ऑक्सीजन थेरेपी लेने के लिए कह सकते हैं।
  2. व्यायाम करें : सप्ताह में कम से कम 3 बार व्यायाम करें। नियमित रूप से व्यायाम करने से आपकी मासपेशियां सशक्त रहती हैं।

नोट :- क्रॉनिक ब्रोन्काइटिस की वजह से फेफड़ों के संक्रमण का खतरा बढ़ता है। इसलिए हर साल फ्लू की वैक्सीन लें। इसके अलावा, निमोनिया से बचाव के लिए हर 5 से 6 वर्षों में न्यूमोकोकल टीकाकरण लगवाएं।

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Frequently Asked Question ( FAQs)

1. ब्रोंकाइटिस और अस्थमा में क्या अंतर है?

ब्रोंकाइटिस और अस्थमा एक दूसरे से अलग है। सही इलाज से अस्थमा ठीक हो सकता है।  वहीं क्रॉनिक ब्रोंकाइटिस  में लगातार इलाज की जरूरत होती है। यह बीमारी आमतौर पर चालीस साल के बाद होती है।

2. ब्रोंकाइटिस कौन सी बीमारी है?

ब्रोंकाइटिस एक फेफड़े या सांस से जुड़ी बीमारी है जोकि वायरस और बैक्टीरिया के कारण होती है। इसके वजह से ब्रोन्कियल ट्यूब में सूजन या जलन हो जाती है। वहीं, ऐसी स्थिति में सांस लेना बहुत मुश्किल हो जाता है क्योंकि वायु मार्ग बलगम या कफ से भर जाता है।

3. हर बार सर्दी लगने पर मुझे ब्रोंकाइटिस क्यों होता है?

ब्रोंकाइटिस आमतौर पर उन्हीं वायरस के कारण होता है जो सर्दी और फ्लू का कारण बनते हैं । संक्रमण आमतौर पर नाक, साइनस, या गले में शुरू होता है और ब्रोन्कियल ट्यूबों में फैलता है, जहां यह सूजन का कारण बनता है जब शरीर संक्रमण से लड़ने की कोशिश करता है।

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