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Vivek Rai-August 23, 2022

मोतियाबिंद सर्जरी (Cataract Surgery) क्या है? सर्जरी के प्रकार और सर्जरी कब करवाना चाहिए?

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मौजूदा जीवनशैली और खानपान की वजह से मोतियाबिंद की समस्या हो जाना आमबात हो गई है। वहीं मोतियाबिंद को कैटरैक्‍ट भी कहा जाता है। अगर किसी व्यक्ति को मोतियाबिंद की समस्या हो जाती है तो उसके आंखों के लेंस में धुंधलापन आ जाता है, जिससे देखने की क्षमता में कमी हो जाती है। वहीं, मोतियाबिन्द की समस्या तब होती है जब आंखों में प्रोटीन के गुच्छे जमा हो जाते हैं जो लेंस को रेटिना को साफ चित्र भेजने से रोकते हैं।
एक रिपोर्ट के मुताबिक, देश में 60 साल और उससे अधिक लोगों में से तकरीबन 74% लोग मोतियाबिंद के शिकार हैं या उनकी मोतियाबिंद सर्जरी (Cataract Surgery) हो चुकी है। ध्यान देने वाली बात यह है कि इनमें महिलाओं की संख्या अधिक है और न्यूक्लियर मोतियाबिंद (Nuclear Cataract) इसका सबसे सामान्य प्रकार है।


मोतियाबिंद सर्जरी के प्रकार (Types of Cataract Surgery) 

मोतियाबिंद सर्जरी (Cataract Surgery) चीरे के आकार और सर्जरी में प्रयोग की जाने वाली तकनीकों के आधार पर कई प्रकार की हो सकती है। यह विषेशरूप से सर्जरी होने वाली आँख के स्वास्थ्य पर निर्भर करता है।

1. माइक्रो इंसीजन मोतियाबिंद सर्जरी (Micro Incision Cataract Surgery)

माइक्रो फेको तकनीक (Micro Phaco Technology) में किसी प्रकार के बड़े चीरे की जरूरत नहीं होती है। इस विधि से सिर्फ 2.8 मिलीमीटर का छेद किया जाता है, जिसके जरिए सफेद मोतिया (White Cataract) को आंख के भीतर ही घोल दिया जाता है और इसी के माध्यम से ही फोल्डेबल लेंस को आंख के अंदर प्रत्यारोपित (Implanted) कर दिया जाता है। वहीं सामान्य सर्जरी आंख के आसपास इंजेक्शन लगाकर उसे सुन्न करके किया जाता है, ताकि आंख स्थिर रहे। जिससे मरीज को दर्द भी होता है और इंजेक्शन से कुछ नुकसान होने की भी संभावना होती है।


2. 
फेम्टो लेजर तकनीक (Femto Laser Technology)

आमतौर पर मोतियाबिंद की सर्जरी (Cataract Surgery) में चार स्टेप होते हैं। वहीं, लेंस जब सफेद हो जाता है तो सबसे पहले राउंड ओपिनंग की जाती है। इसके लिए फेम्टो लेजर तकनीक (Femto Laser Technology) इस्तेमाल की जाती है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि आमतौर पर इसके लिए नीडल का इस्तेमाल होता है, उसे मोड़ा जाता है। वहीं इस तकनीक में लेजर के जरिए यह काम किया जाता है। इसके बाद दूसरे स्टेज में खराब पड़े लेंस को लेजर के जरिए तोड़ा जाता है, ताकि खराब लेंस को आसानी से टुकड़ा बनाकर बाहर निकाला जा सके।
वहीं तीसरे स्टेज में चीरा लगाया जाता है। जिसमें 2.2 एमएम तक का चीरा लगाया जाता है। इसके बाद चौथे स्टेज में सिलेंड्रिक पावर जिसके कारण देखने की क्षमता कम हो जाती है, उसे इस तकनीक से कम किया जाता है। बता दें कि पहले यह काम अल्ट्रासाउंड की सहायता से होता था, अब यह लेजर की मदद से हो रहा है। वहीं, इससे रिजल्ट काफी बेहतर हो रहे हैं।

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मोतियाबिंद का ऑपरेशन कब करवाना चाहिए? (What Stage Cataract Surgery Should be Done?)

मोतियाबिंद की समस्या होने पर सर्जरी (Cataract Surgery) कराना जरूरी नहीं है। यह भी हो सकता है कि इस समस्या से पीड़ित होने पर आपको नजर में कोई बदलाव ही महसूस नहीं हो। दरअसल, मोतियाबिंद के कुछ मरीजों को नेत्र विशेषज्ञ द्वारा बताया गया चश्‍मा लगाने, मैग्‍नीफाइंग लैंस के इस्‍तेमाल या पर्याप्‍त रोशनी से ही साफ दिखने लगता है।

वहीं अगर मोतियाबिंद बढ़ने लगे तो इसकी वजह से कई लक्षण दिखाई देने की संभावना होती है। इसके वजह से आंखों में धुंधलापन आ सकता है या डबल विजन (मोतियाबिंद आंख से एक ही चीज दो दिखाई देना) की समस्या हो सकती है। इन समस्‍याओं की वजह से पढ़ने, कंप्‍यूटर पर काम करने या ऐसा कोई भी काम करने में दिक्‍कत आने की संभावना होती है, जिसके लिए आंखों का तेज होना बेहद जरूरी है। ध्यान देने वाली बात यह है कि जब अन्‍य किसी नेत्र से संब‍ंधित समस्‍या के इलाज में मोतियाबिंद रुकावट पैदा करने लगे तो इस स्थिति में डॉक्टर के द्वारा मोतियाबिंद ऑपरेशन (Cataract Surgery) की सलाह दी जा सकती है।

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ब्लॉग में दी गई तथ्यों की पुष्टि 
डॉ. राहुल शर्मा, जनरल फिजिशियन (एमबीबीएस)

Frequently Asked Question ( FAQs)

1. मोतियाबिंद ऑपरेशन के बाद जटिलताएं (Complications After Cataract Operation)

आमतौर पर मोतियाबिंद के ऑपरेशन के बाद बहुत कम ही जटिलताएं (Complications) आती हैं। ज़्यादातर का सफलतापूर्व‍क इलाज हो जाता है। वहीं जिनमें कुछ जटिलताएं (Complications) आती हैं वो निम्नवत हैं-

•  सूजन
•  संक्रमण
•  ब्‍लीडिंग
•  पलकों का झुकना
•  आर्टिफिशियल लैंस का अपनी जगह से हटना
•  रेटिना अलग होना
•  काला मोतियाबिंद (ग्‍लूकोमा)
•  आंखों की रोशनी कम होना


2.
मोतियाबिंद होने का मुख्य कारण क्या हैं? (What is the main Causes of Cataract?)

बढ़ती उम्र के साथ आंख के लेंस के ऊपर का टिश्यू चोट लगने के कारण बदलने पर भी मोतियाबिंद (Motiyabind) होने की संभावना होती है। इसके अलावा, मोतियाबिंद कई लोगों को उनके परिवार हिस्ट्री की वजह से भी होता है। जैसे- परिवार में माता-पिता को डायबिटीज की समस्या है तो भी मोतियाबिंद होने की संभावना बढ़ जाती है।


3.
मोतियाबिंद कितने प्रकार के होते हैं? (Types of Cataracts)

मोतियाबिंद दो प्रकार के होते हैं :

1. सफेद मोतिया: सफेद मोतिया को वाइट कैटरेक्ट के नाम से भी जाना जाता है। सफेद मोतिया की बढ़ते उम्र के साथ होने की संभावना होती है। वहीं यह आँखों के लेंस को धुँधला कर देता है। इसके वजह से आँखों के कुदरती लेंस के ऊपर सफ़ेद झिल्ली आ जाती है जिससे आप आंखें दिन-प्रतिदिन प्रभावित होने लगती हैं।

2. काला मोतिया: काला मोतिया आँखों की एक खतरनाक अवस्था है। इसे अंग्रेजी में Glaucoma के नाम से जाना जाता है। काला मोतिया होने पर आँखों की दृष्टि समय के साथ कम होती जाती है अगर समय पर इलाज न कराया जाये तो ये अंधेपन के क़रीब ले जा सकता है।

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