Loading...

ब्लॉग

घर   ब्लॉग

Vivek Rai-September 26, 2022

मिर्गी (Epilepsy) क्या है? जानें- कारण, लक्षण, प्रकार और इलाज

Epilepsy-symptoms

मिर्गी (Epilepsy), एक न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर (Neurological Disorder) है। वहीं इस समस्या की वजह से दिमाग में गड़बड़ी हो जाती है और व्यक्ति को बार-बार दौरे पड़ने लगते हैं। नतीजतन,दिमागी में दौरा पड़ने पर दिमागी संतुलन बिगड़ जाता है और शरीर लड़खड़ाने लगता है। कभी-कभी बेहोशी हो जाती है।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि मिर्गी की समस्या (Epilepsy Problem) संक्रामक (जो रोग किसी ना किसी रोगजनित कारकों (रोगाणुओं) जैसे प्रोटोजोआ, कवक, जीवाणु और वायरस इत्यादि के कारण होते हैं।) नहीं है और मानसिक बीमारी या मानसिक कमज़ोरी की वजह से नहीं होती है।

वहीं, मिर्गी आने पर कभी-कभी गंभीर दौरे पड़ने की वजह से मस्तिष्क को नुकसान भी पहुंच सकता है, लेकिन अधिकांश दौरे मस्तिष्क को दिमाग पर प्रभाव नहीं डालते हैं। वहीं, मिर्गी को बिना इलाज के ठीक नहीं किया जा सकता है। इसके बाद भी मिर्गी के मरीजों को समय रहते उचित इलाज नहीं मिल पाता है।

कुछ लोग तो मरीज को डॉक्टर के पास ले जाने की बजाय झाड़-फूंक के चक्कर में पड़ जाते हैं। वहीं गांवों में रहने वाले लोगों में इस बीमारी को लेकर संदेह अधिक हैं। जब मिर्गी की समस्या बढ़ जाती है तब लोग डॉक्टर के पास आते हैं। जोकि मरीज के लिए जानलेवा है। इस अवस्था में मिर्गी के इलाज (Epilepsy Treatment) में भी काफी समय लगता है।

 
आयुष्मान योजना के तहत FREE सर्जरी करवाने के लिए मेडफो हेल्पलाइन नंबर 88569-88569 पर कॉल करें या नीचे दिए गए फॉर्म को भरें।

 

मिर्गी क्या है? (What is Epilepsy?)

मिर्गी (Epilepsy) एक तरह का न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर है। इस समस्या की वजह से मस्तिष्क में गड़बड़ी होने की वजह से व्यक्ति को बार-बार दौरे पड़ने लगते हैं। नतीजतन व्यक्ति का दिमागी संतुलन पूरी तरह से गड़बड़ा जाता है और उसका शरीर लड़खड़ाने लगता है। वहीं मिर्गी के दौरों में तरह-तरह के लक्षण (Symptoms of Epilepsy) होते हैं, जैसे कि बेहोशी आना, गिर पड़ना, हाथ-पांव में झटके आना।

मिर्गी के प्रकार (Types of Epilepsy)

मिर्गी होने पर पड़ने वाले दौरों के आधार पर यह 4 तरह की होती है-

1. सामान्यीकृत दौरा (Generalized Epilepsy): इस तरह का दौरा मरीज को तब पड़ता है जब मरीज के पूरे दिमाग में करंट फैलता है और मरीज बेहोश हो जाता है। यह दौरा सबसे समान्य माना जाता है।

2. आंशिक दौरा (Partial Epilepsy): इस दौरे में रोगी के मस्तिष्क के कुछ हिस्सों में ही मिर्गी की गतिविधि होती है। इस अवस्था में करंट शरीर के एक हिस्से से निकलकर उसी हिस्से में बना रहता है। यह आंख और दिमाग में हो सकता है।

3. अज्ञात शुरुआत (Absence Seizures Epilepsy): इसमें मरीज कोई हरकत नहीं करता। गुमसुम बैठा रहता है। हाथ हिलने लगता या मुंह हिलाने लगता है लेकिन बात नहीं करता।

4. जटिल आंशिक दौरे (Complex Partial Seizures): इसके लक्षण भी कुछ-कुछ एब्सेंस सीजर की तरह ही होते हैं।

आयुष्मान योजना के तहत FREE सर्जरी करवाने के लिए मेडफो हेल्पलाइन नंबर 88569-88569 पर कॉल करें या नीचे दिए गए फॉर्म को भरें।

 

मिर्गी के लक्षण क्या-क्या होते हैं? (What are the Symptoms of Epilepsy?)

- आंखों के आगे अंधेरा छा जाना।
- शरीर का अकड़ जाना।
- मुंह से झाग आना।
- अचानक गिर जाना।
- बेहोश हो जाना।
- आंखों की पुतलियों का ऊपर की तरफ खिंचना।
- हाथ या पैर का लगातार चलना या झटके से लगना।
- होंठ या जीभ काट लेना।

आयुष्मान योजना के तहत FREE सर्जरी करवाने के लिए मेडफो हेल्पलाइन नंबर 88569-88569 पर कॉल करें या नीचे दिए गए फॉर्म को भरें।

 
मिर्गी होने के क्या कारण हैं? या मिर्गी क्यों होती है? (Epilepsy Causes in Hindi)

मिर्गी की समस्या कई कारणों (Causes of Epilepsy) से होती है–

जेनेटिक  प्रभाव:  अगर परिवार में पहले किसी को हुई है, तो भी मिर्गी की समस्या हो सकती है।

सिर में चोट: एक कार दुर्घटना में या किसी अन्य घटना के कारण सिर में लगी चोट की वजह से भी मिर्गी की समस्या हो सकती है।

संक्रामक रोग:  संक्रामक रोग, जैसे मेनिन्जाइटिस, एड्स और वायरल इन्सेफेलाइटिस, मिर्गी का कारण बन सकते हैं।

जन्म के पूर्व की चोट:  जन्म से पहले बच्चे मस्तिष्क की चोट के प्रति संवेदनशील होते हैं, जो कई कारणों से हो सकती है, जैसे – माँ को होने वाला संक्रमण, अल्प पोषण या ऑक्सीजन की कमी। इस मस्तिष्क की क्षति के कारण मिर्गी या मस्तिष्क पक्षाघात हो सकता है।

विकास संबंधी रोग: मिर्गी कभी-कभी विकास संबंधी बीमारियों की वजह से भी हो सकती है, जैसे कि स्वलीनता और न्यूरोफाइब्रोमेटोसिस।

Epilepsy-true-fact

मिर्गी का इलाज क्या है? (Epilepsy Treatment in Hindi)

मिर्गी के मरीज का इलाज (Epilepsy Treatment) लक्षणों की गंभीरता,स्वास्थ्य और चिकित्सा के प्रति प्रतिक्रिया पर निर्भर करता है।  इलाज के कुछ विकल्पों में शामिल हैं –

एंटी-एपिलेप्टिक (एंटीकंवलसेन्ट) दवाएं:  ये दवाएं मरीज को पड़ने वाले दौरों की संख्या को कम कर सकती हैं। कुछ लोगों में ये दौरों को खत्म कर देती हैं। डॉक्टर द्वारा दिए गए निर्देशों के अनुसार दवाएं लेने से ये शीघ्र असर करती हैं।

वेगस तंत्रिका उत्तेजक:  यह उपकरण शल्य चिकित्सा द्वारा छाती पर त्वचा के नीचे लगाया जाता है और बिजली द्वारा गर्दन से होते हुए तंत्रिका को उत्तेजित करता है। इससे दौरों को रोकने में मदद मिल सकती है।

केटोजेनिक आहार:आधे से ज्यादा लोग जिन पर दवाओं का भी असर नहीं होता, उन्हें उच्च वसा और कम मात्रा में कार्बोहाइड्रेट युक्त आहार लेना चाहिए।

मस्तिष्क की सर्जरी:  मस्तिष्क का वह हिस्सा जो दौरों का कारण बनता है, उसे हटाया या बदला जा सकता है।

आयुष्मान योजना के तहत FREE सर्जरी करवाने के लिए मेडफो हेल्पलाइन नंबर 88569-88569 पर कॉल करें या नीचे दिए गए फॉर्म को भरें।


ब्लॉग में दी गई तथ्यों की पुष्टि ,

डॉ राहुल शर्मा जनरल फिजिशियन (एमबीबीएस)

Frequently Asked Question ( FAQs)

1. मिर्गी कब आती है?

लोग कई कारणों से मिर्गी बीमारी की चपेट में आते हैं। दिमाग पर चोट लगने या चोट के निशान रह जाने की वजह से भी अक्सर लोगों को मिर्गी का दौरा पड़ने लगता है। हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक किसी गंभीर बीमारी, तेज बुखार या कार्डियोवस्क्युलर डिसीज (हृदय रोग) की वजह से भी इंसान को ये बीमारी हो सकती है।

2. मिर्गी का इलाज कितने दिन चलता है?

मिर्गी के मरीजों को बिना एक भी दिन बंद किए लगातार तकरीबन 3 सालों तक दवा खानी होती है। यदि लगातार 3 वर्षों तक मिर्गी का दौरा नहीं पड़ता है, तो माना जाता है कि मरीज ठीक हो गया है। इसके बाद दवा धीरे-धीरे बंद की जाती है।

3. मिर्गी जड़ से खत्म करने का इलाज

स्वामी रामदेव के अनुसार अगर एपिलेप्सी को साधारण भाषा में समझे तो जब जब दिमाग में न्यूरॉन कमजोर हो जाते है। तो वह एक दूसरे से टकराने लगते है। जिसके ठीक ढंग से करंट न उत्पन्न होने के कारण मिर्गी का दौरा पड़ने लगता है। अगर आप इस समस्या से परेशान हैं तो योगासन और प्राणायाम करके इससे 1 से 3 माह में जड़ से खत्म कर सकते है।

4. मिर्गी के दौरे आने पर क्या नहीं करें?

  • साइकिल चलाते समय हेलमेट पहनकर रखें।
  • पर्याप्त नींद लें।
  • अल्कोहल या नशीली दवाओं का सेवन करने से बचें।
  • तेज चमकती रोशनी से बचें।
  • तनाव से दूर रहें।
  • कोशिश करें कि टीवी और कंप्यूटर के आगे ज्यादा देर तक न बैठें।

आयुष्मान योजना के तहत FREE सर्जरी करवाने के लिए मेडफो हेल्पलाइन नंबर 88569-88569 पर कॉल करें या नीचे दिए गए फॉर्म को भरें।