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Vivek Rai-September 15, 2022

एंडोमेट्रियोसिस (Endometriosis) बीमारी होने के कारण, लक्षण और बचाव के उपाय

Endometriosis symptoms

एंडोमेट्रियोसिस (Endometriosis) महिलाओं से जुड़ी एक आम स्वास्थ्य समस्या है। वहीं,  एंडोमेट्रियोसिस की समस्या (Endometriosis Problem) तब होती है जब बच्चेदानी (गर्भाशय) की अस्तर के टिश्यू (ऊतक) के समान टिश्यू बच्चेदानी के बाहर या के शरीर के उन अन्य अंगों में बढ़ने लगते हैं। जहां यह सामान्य रूप से नहीं होते।

वहीं, आंकड़ों के मुताबिक, भारत में 1 करोड़ से भी अधिक महिलाएं हर साल एंडोमेट्रिओसिस (Endometriosis) से शिकार होती हैं। भारत में यह हर 10 में से एक महिला को होता है। ऐसे में आइए जानते हैं एंडोमेट्रियोसिस क्या है? (What is Endometriosis?) एंडोमेट्रियोसिस का इलाज क्या है? (What is the Treatment for Endometriosis?)-

एंडोमेट्रियोसिस क्या है? (What is Endometriosis in Hindi)

एंडोमेट्रियोसिस (Endometriosis) महिलाओं की गर्भाशय (Uterus) में होने वाली एक समस्‍या है। इसकी वजह से एंडोमेट्रियल टिशूओं में असामान्य बढ़ोतरी होने लगती है और वह गर्भाशय से बाहर फैलने लगते हैं। ध्यान देने वाली बात यह है कि कभी-कभी तो एंडोमेट्रियम की परत गर्भाशय की बाहरी परत के साथ ही अंडाशय यानि ओवरी, आंतो और अन्य प्रजनन अंगों (Reproductive Organs) तक भी फ़ैल जाती है। इसके अलावा एंडोमेट्रियोसिस की समस्या (Endometriosis Problem) फैलोपियन ट्यूब, ओवरी, लिम्फ नोड्स और पेरिटोनियम को भी प्रभावित कर सकता है।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि आमतौर पर, गर्भाशय में मौजूद एंडोमेट्रियल टिश्यू पीरियड्स यानी माहवारी के दौरान बाहर निकल जाते हैं, लेकिन जब ये किसी और अंग में होते हैं तो बाहर  नहीं निकल पाते हैं। ऐसे में यदि उनका आकार बड़ा हो जाए, तो वे शरीर में काम करने वाले अंगों को प्रभावित करते हैं। वहीं, एंडोमेट्रियोसिस की समस्‍या (Endometriosis Problem) किसी संक्रमण की वजह से नहीं, बल्कि शरीर की आंतरिक प्रणाली में कमी की वजह से होती है।

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एंडोमेट्रियोसिस के लक्षण क्या होते हैं? (What are the Symptoms of Endometriosis?)

सभी महिलाओं में एंडोमेट्रियोसिस के लक्षण (Symptoms of Endometriosis) एक समान नहीं होते हैं। कुछ महिलाओं में एंडोमेट्रियोसिस के लक्षण (Symptoms of Endometriosis in Women) हल्‍के तो कुछ में गंभीर लक्षण देखने को मिल सकते हैं। वहीं एंडोमेट्रियोसिस में पेल्विक हिस्‍से (पेल्विक फ्लोर शरीर का वो हिस्सा है, जिसमें ब्लैडर, यूटेरस, वजाइना और रेक्टम होते हैं।) में दर्द होना सबसे सामान्‍य बात है। इसके अलावा, एंडोमेट्रियोसिस के निम्‍न लक्षण दिख सकते हैं:-

  • मासिक धर्म के दौरान दर्द होना।
  • मासिक धर्म से पहले और दौरान पेट के निचले हिस्‍से में दर्द होना।
  • माहवारी के एक या दो हफ्ते के आसपास ऐंठन महसूस होना।
  • माहवारी के बीच में ब्‍लीडिंग या पीरियड्स में ज्‍यादा ब्‍लीडिंग होना।
  • बांझपन की समस्या।
  • सेक्‍स के दौरान दर्द होना।
  • मल त्‍याग करने में असहज महसूस होना।
  • मासिक धर्म के दौरान कभी भी कमर के निचले हिस्‍से में दर्द होना।

एंडोमेट्रियोसिस का इलाज क्या है? (What is the Treatment for Endometriosis?)

एंडोमेट्रियोसिस की समस्या होने पर मरीज की नियमित जीवन शैली काफी प्रभावित हो जाती है। वहीं, सही समय पर एंडोमेट्रियोसिस का इलाज (Endometriosis Treatment) नहीं किया जाए, तो कई तरह की समस्याएं होने की संभावना होती है। ऐसे में आइए जानते हैं एंडोमेट्रियोसिस का इलाज (Endometriosis Treatment) कैसे किया जाता है-

ओटीसी दर्द दवाएं- एंडोमेट्रियोसिस दर्द से राहत प्रदान करने में ओटीसी दवाएं मदद कर सकती हैं। हालांकि, सभी मामलों में प्रभावी नहीं हैं।

हार्मोन थेरेपी- शरीर के एस्ट्रोजन (आमतौर पर एस्‍ट्रोजन महिलाओं में प्‍लेसेंटा और ओवरी में बनता है।) के लेवल को कम करने में हार्मोन थेरेपी प्रभावी हैं, जोकि दर्द से राहत दे सकती है और एंडोमेट्रियोसिस की विकास को रोक सकती है।

सर्जिकल उपचार - एंडोमेट्रियोसिस की गंभीर मामलों में राहत पाने के लिए सर्जिकल उपचार भी अपनाया जा सकता है। वहीं, ये 2 तरह से किया जाता है-

 लेप्रोस्कोपिक सर्जरी (Laparoscopic Surgery) - एंडोमेट्रियोसिस की समस्या से छुटकारा पाने के लिए लेप्रोस्कोपिक सर्जरी का उपयोग किया जाता है। वहीं लेप्रोस्कोपिक सर्जरी के कोई गंभीर दुष्प्रभाव भी नहीं है। इसमें छोटे चीरे लगाकर हटा दिए जाते हैं।

हिस्टरेक्टॉमी सर्जरी- एंडोमेट्रियोसिस के गंभीर मामलों  में जहां अन्य उपचार विफल हो जाते हैं। ऐसी स्थिति में हिस्टरेक्टॉमी का सुझाव दिया जाता है। इस अंतिम उपाय की सर्जरी में, सर्जन गर्भाशय ग्रीवा(सर्विक्स) में दिखाई देने वाले प्रत्यारोपण घावों (इम्प्लांट लेज़्नस) और अंडाशय (ओवरीज़) को कुछ मामलों में  हटा देते हैं।

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लेप्रोस्कोपिक सर्जरी क्या है? (What is Laparoscopic Surgery?)

लेप्रोस्कोपी एक प्रकार की सर्जरी है जिसे कीहोल सर्जरी (Keyhole Surgery) भी कहा जाता है। लेप्रोस्कोपिक सर्जरी का इस्तेमाल (Use of Laparoscopic Surgery) प्रजनन संबंधी समस्याओं के समाधान के लिए किया जाता है। हालांकि, लेप्रोस्कोपिक सर्जरी (Laparoscopic Surgery) का उपयोग पेट की अन्य समस्याओं और पेल्विक सर्जरी के लिए भी किया जाता है। यह बहुत ही साधारण सर्जरी है।

ध्यान देने वाली बात यह है कि लेप्रोस्कोपी सर्जरी को लेकर लोगों के मन में कई तरह के सवाल रहते हैं, विशेषरूप से फर्टिलिटी से संबंधित। जैसे कि लेप्रोस्कोपिक सर्जरी (Laparoscopic Surgery) के बाद गर्भधारण की संभावना पर क्या प्रभाव पड़ेगा? लेकिन अच्छी बात यह है कि लेप्रोस्कोपिक का आमतौर पर महिलाओं के गर्भधारण की संभावना पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता है। बल्कि यह सर्जरी गर्भधारण में आने वाली रुकावटों को दूर करने में मदद करती है।

लेप्रोस्कोपी सर्जरी (Laparoscopic Surgery) की जरूरत किसे है?

एंडोमेट्रियोसिस (Endometriosis) के सभी मामले एक जैसे नहीं होते हैं। इसलिए, यह सलाह दी जाती है कि मरीज उपलब्ध उपचारों में से किसी एक को चुनने से पहले अपने डॉक्टर से बात करें और उनकी राय लें। वहीं उपचार शुरू करने से पहले डॉक्टर को आपके मामले की जांच करनी चाहिए। ऐसे  में आइए जानते हैं लेप्रोस्कोपी सर्जरी (Laparoscopic Surgery) की जरूरत किसे है-

  • इसका सबसे पहला लक्षण होता है कि पीरियड्स के समय तेज दर्द होना।
  • बुहत अधिक ब्लीडिंग वाले पीरियड्सहोना।
  • अधिक थकान, चक्कर आना. मितली, कब्ज आदि होना।
  • सेक्स के दौरान या बाद में अधिक दर्द होना।
  • बांझपन की समस्या होना।
  • बिना पीरियड्स के श्रोणि के हिस्से में दर्द होना।
  • इसके अलावा कुछ ऐसे भी लक्षण होते हैं, जो कि सिर्फ पीरियड्स के दौरान ही होते हैं-
  • शौच जाते समय तेज दर्द होना, यूरिन में खून आना, गुदा में खून आना और कंधे में दर्द रहना।

Endometriosis-surgery

लेप्रोस्कोपी सर्जरी (Laparoscopy Surgery) कैसे किया जाता है?

लेप्रोस्कोपी, सर्जन के द्वारा की जाती है। सर्जरी शुरू होने ‎से पहले, सर्जन कुछ तैयारी कर ‎सकता है जैसे कि सर्जरी के क्षेत्र को साफ करना और शरीर के बालों को हटाना जो सर्जरी शुरू करने के लिए ठीक ‎नहीं होते हैं और इनकी वजह से मरीज़ को इन्फेक्शन भी हो सकता है। एक बार सभी तैयारियां हो जाने के बाद, सर्जन रोगी के पेट में एक छोटा चीरा लगाता है। कुछ मामलों में लेप्रोस्कोपी सर्जरी (Laparoscopic Surgery) के लिए आवश्यक अधिक उपकरण डालने ‎के लिए एक से अधिक चीरे लगाए जा सकते हैं।

हालांकि, कुछ मामलों में लेप्रोस्कोपी सर्जरी (Laparoscopic Surgery) में पूरी प्रक्रिया लेजर की सहायता से होती है। एक बार सर्जरी का उद्देश्य पूरा हो जाने के बाद, पेट को उसकी मूल स्थिति में वापस बदल दिया जाता है। फिर जो चीरा (चींट) बनाया जाता ‎है, उसे गेज़ या पट्टी की मदद से ढंक दिया जाता है। पूरी सर्जरी में लगभग आधा घंटा से डेढ़ घंटा लग सकता है। एक बार सर्जरी खत्म होने के बाद ‎मरीज को रिकवरी रूम में ले जाया जाता है, जहां उसे कम से कम अगले कुछ घंटों के लिए रहना होता है। रोगी को ‎आमतौर पर उसी दिन या अगले दिन छुट्टी दी जाती है।

लेप्रोस्कोपी के बाद किन बातों का ध्यान रखें? 

लेप्रोस्कोपी के बाद मरीज को जिन बातों का ध्यान रखना होता है, उसके बारे में डॉक्टर के द्वारा बताया जाता है। इसके साथ ही कुछ छोटी-छोटी बातों का भी ध्यान रखना होगा जैसेः-

  • सर्जरी के बाद हुई सूजन को कम करने के लिए हीटिंग पैड का इस्तेमाल करें।
  • सर्जरी के बाद फीजिकल एक्टिविटी भी बहुत अधिक नहीं होना चाहिए।
  • सर्जरी के चीरे को हमेशा चेक करते रहें और नियमित रूप से डॉक्टर के पास चेकअप के लिए जाएं।
  • सर्जरी के बाद अधिक तरल पदार्थ पिएं और हल्का भोजन करें।
  • मसालेदार भोजन से परहेज करें।
  • एक सप्ताह तक गाड़ी नहीं चलाएं।

एंडोमेट्रियोसिस उपचार के बाद होने वाली समस्याएं?

एंडोमेट्रियोसिस उपचार के बाद निम्नलिखित समस्याएं होने की संभावनाएं होती हैं: -

• थकान की समस्या
• अनिद्रा और सिरदर्द की समस्या
• जोड़ और मांसपेशियों में अकड़न की समस्या
• बोन डेंसिटी लॉस की समस्याएं
• मानसिक विकार

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ब्लॉग में दी गई तथ्यों की पुष्टि ,
डॉ. राहुल शर्मा, जनरल फिजिशियन (एमबीबीएस)

Frequently Asked Question ( FAQs)

1. लेप्रोस्कोपी के बाद कितने दिन आराम करें?

यदि लेप्रोस्कोपी के बाद मरीज को कोई समस्या नहीं है, तो उसी दिन छुट्टी मिल सकती है। वहीं इस प्रक्रिया के बाद डॉक्टर द्वारा कम से कम दो से तीन दिनों तक आराम करने की सलाह दी जा सकती है।

2. एंडोमेट्रियोसिस कौन सी बीमारी होती है?

एंडोमेट्रियोसिस एक समस्या है,जिसमें गर्भाशय की लाइनिंग बनाने वाले ऊतक से मिलता हुआ ऊतक गर्भाशय की गुहा के बाहर विकसित होने लगता है। गर्भाशय की लाइनिंग को एंडोमेट्रियम कहते हैं। जब ओवरी, बाउल और पेल्विस की लाइनिंग के ऊतकों पर एंडोमेट्रियल टिश्‍यू विकसित होने लगते हैं, तब एंडोमेट्रियोसिस की समस्‍या उत्‍पन्‍न होती है।

3. एंडोमेट्रियोसिस कौन-सी बीमारी होती है?

एंडोमेट्रियोसिस एक ऐसी समस्या है जिसमें गर्भाशय की लाइनिंग बनाने वाले ऊतक से मिलता हुआ ऊतक गर्भाशय की गुहा के बाहर विकसित होने लगता है। गर्भाशय की लाइनिंग को एंडोमेट्रियम कहते हैं। जब ओवरी, बाउल और पेल्विस की लाइनिंग के ऊतकों पर एंडोमेट्रियल टिश्‍यू विकसित होने लगते हैं, तब एंडोमेट्रियोसिस की समस्‍या हो जाती है।

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