Loading...

ब्लॉग

घर   ब्लॉग

Juli Kumari-October 01, 2022

हाइपरथायरायडिज्म क्या है? जानें कारण, लक्षण और इलाज

Hyperthyroidism

आजकल की इस व्यस्थ और असंतुलित जीवनशैली की वजह से थायराइड (thyroid) डिसऑर्डर होना काफी आम है, डॉक्टर्स का कहना है कि हर 10 में से 1 व्यक्ति थायराइड रोग से पीड़ित है। ये एक हार्मोनल कंडीशन है इसमें थायराइड ग्लैंड के अंदर से थायराइड हार्मोन कम या ज्यादा प्रोड्यूस होने के कारण ऐसा होता है, क्योंकि इन बदलाव के कारण इंटरनल सिस्टम में गड़बड़ी आ जाती है जिसकी वजह से हाइपरथायरायडिज्म (Hyperthyroidism) होता है। आपको बता दें कि, थायराइड बीमारी (Thyroid disease) से पूरी तरह स्वस्थ होना काफी मुश्किल होता है इससे छुटकारा पाने के लिए मरीज को लगातार दवाइयों का सेवन करना होगा और खानपान व जीवनशैली मे भी संतुलन बनकार चलना होगा। 

हाइपरथायरायडिज्म क्या है? (What is Hyperthyroidism?)

आजकल थायराइड की बीमारी (Thyroid disease) होना नॉर्मल हो गया है, हाइपरथायरायडिज्म (Hyperthyroidism) तब होता है जब थायरॉयड थायरोक्सिन को ज्यादा रिलीज करने लगता है। डॉक्टर्स बताते हैं कि शरीर में मौजूद पिट्यूटरी ग्रंथि और हाइपोथैलेमस ग्रंथि दोनों मिलकर TSH और TRH हार्मोन को संतुलित करती हैं जिससे थायरायड ग्रंथि नियंत्रित रहती है। जब जब थायराइड के उत्पाद में दिक्कतें होती हैं तब पिट्यूटरी ग्रंथि और हाइपोथैलेमस ग्रंथि TSH और TRH छोड़ती हैं। 

हाइपरथायरायडिज्म के कारण (Causes of Hyperthyroidism)

हाइपरथायरायडिज्म होने के पीछे कई कारण हैं जैसे- 

1.थायराइडाइटिस (Thyroiditis)

ये थायरायड ग्रंथि में संग्रहीत होने वाले हार्मोन के रिसाव के कारण बनता है, इस प्रक्रिया से थायरायड हार्मोन में वृद्धि होती है।

2.ग्रेव्स डिजीज (Graves’ disease)

ग्रेव डिजीज (Graves’ disease) के बारे में कहा जाता है कि जो लोग धूम्रपान करते हैं, वो इस बीमारी के शिकार हो सकते हैं। ग्रेव्स एक ऑटोइम्यून बीमारी है, जिसकी वजह से थायरॉयड ग्रंथि अधिक हार्मोन उत्पादन करती है। ये बीमारी आमतौर पर 30 से 50 वर्ष की आयु के बीच की महिलाओं को होता है।

आयुष्मान योजना के तहत FREE इलाज के लिए Medpho हेल्पलाइन नंबर 88569-88569 पर #BasEkCall करें या नीचे दिए गए फॉर्म को भरें।

 

3.ओवरएक्टिव थायराइड नोड्यूल (Overactive thyroid nodules)

थायराइड नोड्यूल एक प्रकार के तरल पदार्थों से भरे हुए गांठ होते हैं जो नोड्यूल थायरोक्सिन उत्पादन को बढ़ाते हैं। डॉक्टर्स के अनुसार ये एक अनुवांशिक बीमारी है। 

4.अत्यधिक आयोडीन का सेवन (Too much iodine)

जो लोग अधिक आयोडीन का सेवन करते हैं उन लोगों को ये बीमारी आसानी से हो जाती है, लेकिन ज़रूरी नहीं कि ये सभी को प्रभावित करे, कुछ लोगों को इससे कुछ खास फर्क नहीं पड़ता लेकिन कई लोग थायराइड के शिकार हो जाते हैं।  

हाइपरथायरायडिज्म के लक्षण (Symptoms of Hyperthyroidism)

हाइपरथायरायडिज्म के लक्षणों (Symptoms of Hyperthyroidism) की बात करें तो इसके लक्षण अलग-अलग व्यक्ति में अलग-अलग हो सकते हैं। आमतौर पर जो लक्षण थायराइड के रोगियों में दिखते हैं वो नीचे दिए गए हैं- 

  • चिड़चिड़ापन
  • थकान
  • मांसपेशियों में दर्द व सूजन
  • कमजोरी
  • गर्मी सहन ना कर पाना
  • नींद में कमी
  • दस्त लगना
  • वजन का घटना
  • मूड स्विंग्स होना
  • अनियमित दिल की धड़कन

ऊपर बताए गए हाइपरथायरायडिज्म लक्षण (Hyperthyroidism Symptoms) वो लक्षण हैं जो आमतौर पर मरीज में दिखाई देते हैं लेकिन 60 वर्ष से अधिक आयु के लोगों में अवसाद भी हाइपरथायरायडिज्म के लक्षण हो सकते हैं।

आयुष्मान योजना के तहत FREE इलाज के लिए Medpho हेल्पलाइन नंबर 88569-88569 पर #BasEkCall करें या नीचे दिए गए फॉर्म को भरें।

 

हाइपरथायरायडिज्म से किसे खतरा है (Risk of Hyperthyroidism)

वैसे तो थायराइड किसी को भी हो सकता है लेकिन कुछ लोगों में हाइपरथायरायडिज्म का खतरा काफी ज्यादा होता है जैसे-

  • महिलाएं 
  • 60 वर्ष से अधिक उम्र वाले लोग
  • अनुवांशिकता
  • प्रेग्नेंसी के बाद
  • थायरायड सर्जरी होना 
  • दिल की धड़कन तेज होना 
  • टाइप 1 डायबिटीज 
  • आयोडीन की कमी 
  • होर्मोनल असंतुसन
  • आयोडीन ज्यादा होने से

Hyperthyroidism

हाइपरथायरायडिज्म का इलाज (Hyperthyroidism Treatment) 

हाइपरथायरायडिज्म के इलाज (Hyperthyroidism Treatment) की बात करें तो शुरु में इसका इलाज करवाना ही समझदारी है, क्योंकि बीमारी जब गंभीर स्थिति में पहुंच जाती है तो रोगी को और भी कई तरह की बीमारियां हो जाती हैं। इसलिए समय रहते हाइपरथायरायडिज्म का इलाज ज़रुरी होता है। सबसे पहले तो डॉक्टर्स मरीज को कुछ टेस्ट करवाने की सलाह देते हैं जिससे ये पता लगाया जा सके कि मरीज की स्थिति कैसी है और उसे किस तरह के उपचार की आवश्यकता है। जिसके बाद नीचे दिए गए कुछ तरीकों से इलाज किया जाता है- 

1. दवाइयां- हाइपरथायरायडिज्म का इलाज (Hyperthyroidism Treatment) सबसे पहले दवाइयों की मदद से ही किया जाता है, लेकिन आप खुद से किसी भी तरह की दवा का सेवन ना करें। सबसे पहले डॉक्टर से सलाह लें अपना टेस्ट करवाएं उसके बाद डॉक्टर के कहे अनुसार ही दवाइयों का सेवन करें। 

2. रेडियोधर्मी आयोडीन-  इलाज के इस प्रक्रिया के जरिए थायराइड हार्मोन उत्पन्न करने वाली कोशिकाओं को नष्ट किया जाता है। इस प्रक्रिया का रेडिएशन दूसरों तक फैल सकता है इसलिए मरीज को काफी सावधानी बरतने की ज़रुरत पड़ती है। 

3.सर्जरी- ये काफी दुर्लभ प्रक्रिया है, आमतौर पर डॉक्टर पहले दवाइयों से ही हाइपरथायरायडिज्म को कंट्रोल करने की कोशिश करते हैं जब मरीज की स्थिति ज्यादा गंभीर हो जाती है तब सर्जरी का सहारा लिया जाता है जो काफी प्रभावशाली है।

आयुष्मान योजना के तहत FREE इलाज के लिए Medpho हेल्पलाइन नंबर 88569-88569 पर #BasEkCall करें या नीचे दिए गए फॉर्म को भरें। 

 

ब्लॉग में दी गई तथ्यों की पुष्टि ,

डॉ राहुल शर्मा जनरल फिजिशियन (एमबीबीएस)

Frequently Asked Question ( FAQs)

1. क्या हाइपरथायरायडिज्म अपने आप ठीक हो सकता है?

कई मामलो में हाइपरथायरायडिज्म अपने आप ठीक हो जाता है, आमतौर पर ज्यादातर मामलों में, रक्त में टीएसएच का कम स्तर कुछ महीने में ही सामान्य होने लगता है और थायरायड अपने आप ठीक हो सकता है।

2. थायराइड में गुड़ खा सकते हैं क्या?

थायराइड होने पर व्यक्ति को कैफीन और ज्यादा शुगर लेने से माना किया जाता है, क्योंकि इससे थायराइड ग्लैंड बढ़ता है जिससे दवा का असर कम होता है। इसके अलावा चीनी से पाचन क्रिया भी प्रभावित होती है।

3. हाइपर थायराइड कितने दिन में ठीक हो जाता है?

अगर आप समय समय पर दवाइयों का सही डोज लेते रहें तो आप जल्द ही इस बीमारी से छुटकारा पा सकते हैं। इसके अलावा आपको स्वस्थ होने में कितना समय लगेगा ये आपके थायरायड की स्थिति पर निर्भर करता है। 

आयुष्मान योजना के तहत FREE इलाज के लिए Medpho हेल्पलाइन नंबर 88569-88569 पर #BasEkCall करें ।